चित्रकूट। समाज को नई दिशा दिखाने वाले और रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ने वाले फैसले अक्सर इतिहास रचते हैं
ऐसा ही कुछ देखने को मिला जनपद की मऊ तहसील अंतर्गत ग्राम पियारा खांडेह में। यहाँ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के कद्दावर नेता और जाने-माने समाजसेवी स्वर्गीय रामअभिलास पाल की स्मृति में उनके परिवार और समाज ने एक ऐतिहासिक और अनुकरणीय पहल की। बीती 2 जुलाई को हापुड़ में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में रामअभिलास पाल का अल्पायु में आकस्मिक निधन हो गया था। उनके मिलनसार व्यक्तित्व और निस्वार्थ सेवा भावना के कारण पूरे क्षेत्र में शोक की लहर थी। अल्पायु में हुए इस वज्रपात के बाद शोक-संतृप्त पाल परिवार और प्रबुद्ध समाज के लोगों ने एक साहसिक निर्णय लिया। समाज में व्याप्त मृत्युभोज (तेरहवीं संस्कार) जैसी कुप्रथा और फिजूलखर्ची का पुरजोर विरोध करते हुए उन्होंने पारंपरिक भोज के स्थान पर मृतक की आत्मा की शांति के लिए एक विशाल ‘श्रद्धांजलि सभा’ का आयोजन करने का फैसला किया। 15 जुलाई को उनके पैतृक गाँव पियारा खांडेह में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। दिवंगत रामअभिलास पाल के सामाजिक योगदान को याद करने और परिवार के इस प्रगतिशील कदम का समर्थन करने के लिए विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता, समाजसेवी और भारी संख्या में ग्रामीण जुटे। सभा में मुख्य रूप से बसपा जिलाध्यक्ष शिवबाबू वर्मा, अनिल प्रधान (विधायक कर्वी), चंद्रभान सिंह (पूर्व विधायक), मीरा भारती (जिला पंचायत सदस्य), स्वर्गीय श्याम सेवा समिति (सुरौंधा) के पदाधिकारी एवं खांडेरा विकास समिति के सदस्यगण, युवा समाजसेवी रामकुमार पाल, ब्रह्मप्रकाश पाल, भरत सिंह, कंचन सिंह, विनय पाल (अधिवक्ता) समेत तमाम सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित हुए और दिवंगत रामअभिलास पाल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। नेताओं और समाजसेवियों ने उनके सामाजिक क्षेत्र में किए गए कार्यों को याद करते हुए कहा कि रामअभिलास पाल ने अपने मिलनसार स्वभाव से हर दिल में अपनी एक अलग छवि बनाई थी। दुख की इस घड़ी में भी पाल परिवार ने तेरहवीं भोज जैसी फिजूलखर्ची को त्यागकर समाज के सामने जो मिसाल पेश की है, वह वाकई अनुकरणीय है। यह रूढ़िवादिता के खिलाफ एक बड़ी वैचारिक क्रांति है। सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की गई और समाज के युवाओं से अपील की गई कि वे इस प्रेरणादायक पहल को आगे बढ़ाएं। -भगवान सिंह पाल

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